तन व मन की शांति के लिए दीप यज्ञ

नालंदा (बिहार)हरनौत- प्रखंड के चेरन गांव में सात दिवसीय महामृत्युंजय यज्ञ किया जा रहा है। इसके बीच युवाओं ने कोरोना महामारी को देखते हुए मानव जीवन में मन व तन की शांति के लिए दीप यज्ञ किया। इसमें गाय के घी से 251 दीये जलाये गये।
गया से आये यज्ञ के आचार्य श्री आदित्य नारायण पांडेय ने कहा कि दीपयज्ञ एक कम खर्चीला भावपूर्ण स्वचालित सुगम आहुति सिस्टम है। जिसमें यज्ञ का पूर्ण लाभ मिलता है। गायत्री मंत्रों के साथ भावपूर्ण इदं न मम की भावना के साथ आहुति दी जाती है । आज संसार में हर तरफ़ स्वार्थ का यह मेरा है का भाव फैला है। ‘इदं न मम’ परमार्थ का सूत्र दे रहा है अर्थात् यह मेरा नही ईश्वर सब तुम्हारा है|
दीपयज्ञ प्रदूषण को भी कम करता है और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है। गाय का घी रोगाणुओं को भगाता है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है|
शरीर में चंद्र,सूर्य और सुषुम्ना तीन प्रमुख नाड़ियां हैं। शरीर में चंद्र नाड़ी से ऊर्जा प्राप्त होने पर मनुष्य तन एवं मन की शांति को महसूस करता है। घी से जलाया हुआ दीपक शरीर की तीनों प्रमुख नाड़ियों को जागृत करता है|
यज्ञ में अभिषेक कुमार, मनमीत, सुमित और आशुतोष ने सक्रिय भूमिका निभाई।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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