समस्तीपुरःरामायण के राम व महाभारत के कृष्ण के भरोसे काट रहे लाॅक डॉउन का वक्त

आजतक 24लाइव/एस.रमण

 

समस्तीपुर/बिथानः-रामायण के राम और महाभारत के कृष्ण के भरोसे प्रखंड वासी लाॅक डाउन का वक्त गुजार रहे हैं। दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर रामायण व डीडी भारती चैनल पर दिखाए जा रहे महाभारत जैसे टीवी सीरियल दर्शकों को खूब रास आ रहे हैं।इन दोनों धारावाहिकों के जरिए लोग जहां कोरोना का खौफ मिटाने का जतन कर रहे हैं वहीं मन में अध्यात्म का भाव लाकर सकारात्मक सोच विकसित कर रहे हैं।दरअसल टीवी चैनलों पर पहले से घरेलू कलह,साजिश,सास बहू के झगड़े और सीनेमाई मार-धाड़ वाले सीरियल देख कर लोग ऊब चुके हैं।इतना ही नहीं कोरोना के खौफ के माहौल में इस तरह के सीरियल मन को और बीमार कर रहे थे जिससे घरों में लॉक डॉन का वक्त गुजारना मुश्किल साबित हो रहा था।

 

 

ऐसे में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पहल पर शुरू किए गए दोनों सीरियल लोगों को स्वच्छ हवा के झोंकों की तरह लग रहे हैं जो उनके मन मिजाज को पूरी तरह बदल रहे हैं।आलम यह है कि इन धारावाहिकों के हर एपिसोड में डूब जाने वाले बुजुर्ग न केवल इसे पसंद कर रहे हैं बल्कि कोरोना के कारण उत्पन्न संक्रमण काल के लिए उपयोगी भी बता रहे हैं।इस संबंध में शिक्षाविद बालविजय कुमार ने कहा महाभारत और रामायण सीरियल आज दिनचर्या में शामिल हो गया है।समय पर तैयार होकर घर के सभी सदस्य टीवी के सामने जम जाते हैं। इस तरह का सीरियल सकारात्मक प्रभाव डालता है और पूरे परिवार के लोग एक साथ बैठकर देख भी सकते हैं।शिक्षाविद गुणानंद प्रसाद ने कहा बच्चों और नई पीढ़ी के युवाओं को यह सीरियल अपने साथ बिठा कर दिखाना चाहिए और वह खुद भी ऐसा ही करते हैं ताकि कोरोना को लेकर उनके मन में बैठने वाला भय का भाव मिटता रहे।

 

 

 

दोनों धारावाहिकों के कारण लाॅक डाउन का वक्त खलता नहीं।शिक्षाविद कुन्दन कुमार ने कहा हम सब कोरोना वायरस को लेकर घरों में बंद हैं।उसमें महाभारत व रामायण जैसा सीरियल संजीवनी साबित हो रहा है।टीवी न्यूज़ चैनल पर आने वाले समाचारों से मन व्याकुल हो जाता है।खासकर महिलाओं और बच्चों पर इसका असर पड़ता है। ऐसे में दोनों ही सीरियल नम को काफी राहत देते हैं।शिक्षाविद अमित कुमार ने कहा रामायण और महाभारत अध्यात्म से जुड़े हैं जिससे हम सब की आस्था भी जुड़ी हुई है।दोनों ही सीरियल मन की नकारात्मकता को दूर करते हैं। आज हम सब कोरोना के कारण जिस तरह अज्ञात भय के माहौल में जी रहे थे उससे दोनों धारावाहिकों ने हमें निकाला है। इससे हमारा वक्त भी कट जाता है।शिक्षाविद सुशांत यादव सुमित ने कहा घर में लॉक डाउन को लेकर घर में वक्त गुजारना कवठिन लग रहा था।शुरुआती दौर में विभिन्न टीवी चैनलों पर आने वाले सीरियलों से मन उबाऊ होने लगा था।ऐसे में अचानक करीब तीन दशकों के बाद रामायण और महाभारत जैसा सीरियल आ गया। दोनों ऐसे सीरियल हैं जिन्हें बार-बार देखने की इच्छा होती है।

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