जांच के नाम पर पैसा उगाही का बाजार गर्म : फैक्टनेब

पटना, 21 फरवरी ~ 222 संबद्ध महाविद्यालयों का सत्र 2009 -12 एवं 2010-13 का सहायक अनुदान राशि भुगतान हेतु बिहार सरकार द्वारा दो सौ उनचास करोड़ छिहतर लाख रुपये विमुक्त किये । उक्त राशि को विश्वविद्यालय के माध्यम से महाविद्यालयों को भुगतान हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा एक बार 24/09/2020 से 30/09/2020 तक जांच किया गया पुनः दुसरी बार 08/12/2020 से 14/12/2020 तक जांच किया गया परन्तु महाविद्यालयों को अनुदान राशि भुगतान नहीं किया गया । पुनः तीसरी बार महाविद्यालयों का कागजात जांच का 03/03/2021 से 08/03/2021 तक का तिथि निर्धारित किये जाने पर बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने आक्रोश प्रकट किया है ।
फैक्टनेब के प्रधान संयोजक डा.शंभूनाथ प्रसाद सिन्हा, राज्य संयोजक प्रो. राजीव रंजन,मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम ,प्रो. श्रवण कुमार एवं प्रो.नसीम रेजा खान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि महाविद्यालयों की कागजात जांच की प्रक्रिया लगातार जारी रहता है , परन्तु अनुदान राशि भुगतान करते समय एक ही तरह की जांच बार बार करने का उद्देश्य जांच करना नहीं बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारों और कर्मचारियों द्वारा पैसा उगाही करना है । शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय , संबद्ध महाविद्यालयों को दुधारू गाय समझती है एवं ए.टी. एम. की तरह इस्तेमाल करती है । 2009-12 और 2010-13 की राशि निर्गत हेतु 2020-21 मे जांच का कोई औचित्य नहीं है ।
फैक्टनेब नेताओं ने राज्य सरकार से मांग किया है कि जांच प्रक्रिया अतिशीघ्र पुरी कर अनुदान राशि निर्गत करने का र्निदेश शिक्षा विभाग को दिया जाये तथा अनावश्यक विलंब करने के लिये दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाये ।
ज्ञातव्य है की फैक्टनेब के आह्वान पर शिक्षाकर्मी 25 फरवरी को बिहार विधान मंडल के समक्ष धरना पर बैठेंगे तथा विरोध प्रर्दशन करेंगे ।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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