चौपाल में समेकित कृषि प्रणाली पर जोर

* बढ़ी आबादी के लिए अधिक अनाज की जरुरत

नालन्दा (बिहार) – हरनौत प्रखंड के पचौरा पंचायत के अलीपुर, पोआरी के लंघौरा और लोहरा पंचायत के पतसिया गांव में क्रमवार किसान चौपाल लगाया गया। इस दौरान देश की बढ़ती आबादी को लेकर अतिरिक्त अनाज की बढ़ती जरुरत पर फोकस किया गया। बताया कि इसके लिए समेकित कृषि प्रणाली को अपनाने की जरुरत है।
कृषि सलाहकार सुजीत कुमार ने कहा कि आबादी के अनुरुप अनाज के उत्पादन के लिए हमें आहार श्रृंखला का उपयोग लाभकारी होगा। कुक्कुट पालन के दौरान उससे प्राप्त अपशिष्ट मछलियों के लिए बेहतर आहार होते हैं। इसी तरह पशुपालन से मिले अपशिष्ट का भी उपयोग मछली पालन के लिए जलाशय को उनके अनुकूल बनाता है। बाद में जब जलाशय को साफ किया जाता है तो प्राप्त अपशिष्ट मिट्टी के लिए बेहद उपयुक्त उर्वरक का काम करते हैं।
बागवानी में तो इसका प्रयोग बहुत बढ़ा है। इसके अलावा वर्मी कंपोस्ट युनिट लगाकर हम केंचुआ खाद तैयार कर सकते हैं। इसमें मिट्टी को जैविक तरीके से उर्वरा बनाने और कीट-व्याधि के नियंत्रण की क्षमता होती है।
समन्यक विनोद कुमार बताते हैं कि मिट्टी कृषि का मूल है। यदि वह स्वस्थ होगी तो उससे मिलने वाले कृषि उत्पाद भी गुणवत्ता पूर्ण होंगे। इसके लिए जरुरी है कि हम अपने आसपास, घर की रसोई से मिले अपशिष्टों का उपयोग कर मिट्टी को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध करायें, जिससे वह स्वस्थ व संतुलित रहे।
जैविक खेती को बढ़ावा के लिए सरकारी स्तर से केंचुआ खाद की युनिट लगाने पर अनुदान की व्यवस्था भी की गई है।
चौपाल में समन्वयक नवीन कुमार, कृषि सलाहकार शंभु कुमार, वीरेंद्र कुमार, विनय व अन्य मौजूद थे।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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