महिला किसान दिवस पर सिखाये सशक्तिकरण के गुर

नालन्दा (बिहार)हरनौत- कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में गुरुवार को महिला किसान दिवस पर कार्यशाला की गई। इसकी अध्यक्षता गृह वैज्ञानिक डॉ ज्योति सिन्हा ने की।
कार्यक्रम में हरनौत, हासनचक, पोरई, चेरन, खरुआरा व द्वारिकाबीघा की महिलायें शामिल हुईं।
डॉ सिन्हा ने बताया कि कृषि के विभिन्न क्षेत्रों के कार्य काफी धीमे व ऊबाउ होते हैं। धीरे-धीरे पूरे होने वाले इन कार्यों में 70 फीसदी जिम्मेवारी महिलाओं की ही होती है। ऐसे में महिलाओं को कृषि कार्य में सशक्त बनाना बेहद जरुरी है। भारत सरकार की भी यही अभिलाषा है। कार्यशाला के माध्यम से उन्हें सही खाद, उत्तम बीज व कीटनाशक की सही मात्रा के प्रयोग की जानकारी दी गई।
बागवानी विशेषज्ञ डॉ विभा रानी ने बताया कि कृषि की उन्नत तकनीक की जानकारी महिलाओं के लिए अतिआवश्यक है। उनके लिए हल्के कृषि यंत्र, बागवानी व प्रसंस्करण से जुड़े यंत्रों की भी विस्तार से जानकारी दी गई।
समूह व को-ऑपरेटिव के माध्यम से महिलाएं कृषि यंत्र बैंक की स्थापना कर सकती हैं। उन्हें विभिन्न प्रकार के कृषि उद्योग जैसे मशरुम उत्पादन, वर्मी कंपोस्ट निर्माण, बकरी, मछली, मधुमक्खी पालन, बागवानी आदि से जोड़ा जा सकता है।
पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ संजीव रंजन ने बताया कि स्वास्थ्य व पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी महिलाओं की ही होती है। महिला सशक्तिकरण से उनमें आर्थिक बदलाव के साथ परिवार के स्वास्थ्य व पोषण में गुणात्मक सुधार होगा। वर्तमान वैश्विक हालातों में इसकी आवश्यकता से इंकार नहीं किया जा सकता है।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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