मुर्गीपालन के आर्थिक मुल्यांकन को होगा अनुसंधान, चेरन, द्वारिकाबीघा व बेन के किसान को दिये गये चूजे,

नालन्दा (बिहार)हरनौत- आत्मा, नालंदा से प्रायोजित कम लागत की अर्द्ध सघन मुर्गीपालन तकनीक के अंतर्गत हरनौत के चेरन, द्वारिकाबीघा व बेन के एक-एक किसान को चूजे दिये गये।
कृषि विज्ञान केंद्र के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ संजीव रंजन ने बताया कि मुर्गी की देशी नस्लों वनराजा, ग्रामप्रिया व कड़कनाथ के पालन के आर्थिक मुल्यांकन पर अनुसंधान के लिए संबंधित किसानों को चूजे दिये गये हैं। योजना से किसानों के यहां शेड बनकर तैयार है। वहां अब चूजों का पालन किया जायेगा।
विशेषज्ञ डॉ रंजन ने बताया कि वनराजा व ग्रामप्रिया नस्ल की मुर्गी अंडे और मांस दोनों के लिए पाली जाती हैं। जबकि, कड़कनाथ नस्ल विशेषकर मांस के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसी वजह से कड़कनाथ की मार्केट वैल्यु अन्य दोनों नस्लों के दोगुना से भी ज्यादा होती है।
उन्होंने बताया कि मुर्गीपालन में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। इस वजह से अपने जिले में कौन-सी नस्ल पालन के उपयुक्त होगी। किसमें स्थानीय जलवायु के अनुकूल बढ़वार की क्षमता है। इसकी भी समय-समय पर जांच की जायेगी। इसी के अनुसार आगे मुर्गीपालन में संभावना तलाशी जायेंगी।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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